सच ये है..
सच ये है, बेकार हमें ग़म होता है..
जो चाहा था दुनिया में, कम होता है..!!
गैरों को कब फुरसत है दुःख देने की ..
जब होता है कोई हमदम होता है..!!
ज़हन की शाखों पर अशार आ जाते हैं..
जब तेरी यादों का मौसम होता है..!!
ज़ख्म तो हमने इन आँखों से देखे हैं..
लोगों से सुनते हैं मरहम होता है..!!
जो चाहा था दुनिया में, कम होता है..!!
गैरों को कब फुरसत है दुःख देने की ..
जब होता है कोई हमदम होता है..!!
ज़हन की शाखों पर अशार आ जाते हैं..
जब तेरी यादों का मौसम होता है..!!
ज़ख्म तो हमने इन आँखों से देखे हैं..
लोगों से सुनते हैं मरहम होता है..!!


