Ashtray: November 2007

Friday, November 23, 2007

सच ये है..

सच ये है, बेकार हमें ग़म होता है..
जो चाहा था दुनिया में, कम होता है..!!

गैरों को कब फुरसत है दुःख देने की ..
जब होता है कोई हमदम होता है..!!

ज़हन की शाखों पर अशार आ जाते हैं..
जब तेरी यादों का मौसम होता है..!!

ज़ख्म तो हमने इन आँखों से देखे हैं..
लोगों से सुनते हैं मरहम होता है..!!