Ashtray: सच ये है..

Friday, November 23, 2007

सच ये है..

सच ये है, बेकार हमें ग़म होता है..
जो चाहा था दुनिया में, कम होता है..!!

गैरों को कब फुरसत है दुःख देने की ..
जब होता है कोई हमदम होता है..!!

ज़हन की शाखों पर अशार आ जाते हैं..
जब तेरी यादों का मौसम होता है..!!

ज़ख्म तो हमने इन आँखों से देखे हैं..
लोगों से सुनते हैं मरहम होता है..!!

3 Comments:

Blogger उन्मुक्त said...

अच्छी तुक बन्दी है हिन्दी में और भी लिखिये।

8:14 PM  
Blogger Jeet said...

याद दिला दी तुमने... मैं तुरन्त ये गज़ल सुनता हूँ :-) कैसे हो?

2:55 AM  
Blogger Appul Jaisinghani said...

@Jeet: Badhiya hee hoon.. but life mein kaafi busy busy ho raha hai!

6:35 AM  

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